500 साल पहले क्या खाते थे भारतीय? बिना आलू, टमाटर और लाल मिर्च के कैसा था मुगलों और राजपूतों का भोजन! 🤯

DAM ExclusiveBy The Empire files

हमेशा से हमें मुगलों और राजपूतों के युद्ध और बहादुरी के किस्से सुनाए गए हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इतनी ताकत और ऊर्जा के लिए ये महान योद्धा क्या खाते थे? महाराणा प्रताप या अकबर की थाली में क्या परोसा जाता था?

हैरानी की बात तो यह है कि आज के समय में भारतीय खाने की जान माने जाने वाले आलू, टमाटर और लाल मिर्च उस समय भारत में थे ही नहीं![00:28] जी हां, अकबर ने अपने पूरे जीवन में कभी आलू नहीं खाया। 16वीं शताब्दी तक ये चीजें भारत में नहीं थीं, इन्हें बाद में पुर्तगाली (Portuguese) भारत लेकर आए थे [00:51]।

तो आइए जानते हैं कि उस जमाने में बिना इन सब्जियों के हमारा खाना कैसा होता था:

1. बिना लाल मिर्च के कैसे बनता था तीखा खाना? उस दौर में खाने को तीखा बनाने के लिए लाल मिर्च की जगह काली मिर्च, लौंग और पिपलीका इस्तेमाल किया जाता था [01:01]। यानी उस समय के खाने का स्वाद आज के स्वाद से बिल्कुल अलग हुआ करता था।

2. मुगलों का शाही और खुशबूदार खाना मुगलों को खाने का बहुत शौक था। उनका खाना पर्शियन, सेंट्रल एशियन और भारतीय स्वाद का एक रॉयल मिक्स होता था [01:10]।

  • खुशबू और रिचनेस: मुगलों के किचन में खाने की खुशबू सबसे जरूरी थी [01:16]। वे ज्यादा तीखा नहीं, बल्कि केसर, बादाम, पिस्ता, घी और ड्राई फ्रूट्स से भरपूर 'रिच' खाना पसंद करते थे।
  • यखनी पुलाव: मुगलों ने ही बिरयानी और पुलाव को शाही पहचान दी। वे चावल को 'यखनी' (मीट स्टॉक) में पकाते थे ताकि स्वाद और बेहतर हो सके [01:27]।
  • बाबर के विदेशी फल: बाबर को भारतीय फल ज्यादा पसंद नहीं थे, इसलिए वह सेंट्रल एशिया से अंगूर और खरबूजे मंगवाता था [01:33]।

3. राजपूतों का ताकतवर और टिकाऊ भोजन राजपूतों का लाइफस्टाइल जितना दमदार था, उनका खाना भी उतना ही स्ट्रॉन्ग और साधारण था [01:46]।

  • शिकार और लाल मांस: राजपूत शिकार के शौकीन थे और उनकी सबसे फेवरेट डिश 'लाल मांस' (Laal Maas) थी [01:58]। हालांकि, तब उसमें आज वाली लाल मिर्च नहीं होती थी।
  • बाटी का आविष्कार: राजस्थान में पानी की कमी थी, इसलिए ऐसा खाना बनाया जाता था जो जल्दी खराब न हो। इसीलिए 'बाटी' मशहूर हुई, जो मिट्टी के अंदर पकती थी और कई दिनों तक चल जाती थी [02:09]।
  • देसी खान-पान: राजपूतों के खाने में घी, दूध और दही का भरपूर इस्तेमाल होता था। 'कैर सांगरी' जैसी सूखी सब्जियां उनकी खास डिश हुआ करती थीं [02:14]।

4. आम आदमी की थाली में क्या था? आम इंसान की पहुंच इन शाही पकवानों तक नहीं थी।

  • शाही खिचड़ी: आम लोग दाल और चावल से बनी सादी खिचड़ी खाते थे [02:34]। यह खिचड़ी इतनी स्वादिष्ट होती थी कि मुगल बादशाह जहांगीर को भी यह बहुत पसंद आई और उन्होंने इसका नाम 'लजीज़ा' रखा था [02:41]।
  • मोटी रोटियां: गांव के लोग लौकी, तरोई और करेला उगाते थे। उस समय गेहूं की बजाय बाजरा, ज्वार और मक्के की मोटी रोटियां ज्यादा खाई जाती थीं [02:52]। मिठास के लिए चीनी की जगह 'गुड़' का इस्तेमाल होता था।

5. मौसम के अनुसार भोजन और देसी उपाय उस समय फ्रिज नहीं हुआ करते थे, इसलिए लोग पूरी तरह से मौसमी (Seasonal) खाना खाते थे [02:59]।

  • गर्मियों का ड्रिंक: गर्मी से बचने के लिए सत्तू, गुलाब जल और बेल का जूस पिया जाता था [03:05]।
  • सर्दियों की डाइट: मुगलों की सर्दियों की डाइट में हैवी मीट और ड्राई फ्रूट्स होते थे, जबकि राजपूत शरीर को गर्म रखने के लिए बाजरे की रोटी और घी खाते थे [03:11]।
  • खट्टापन कैसे आता था?: खाने में खट्टापन लाने के लिए टमाटर की जगह 'इमली' और 'आमचूर' का उपयोग किया जाता था [03:17]।

निष्कर्ष आज हम रेस्टोरेंट्स में जो भारतीय भोजन देखते हैं, असली इंडियन फूड वैसा नहीं था [03:22]। समय के साथ हमारी थाली पूरी तरह बदल गई है। मुगलों की रिचनेस, राजपूतों की ताकत और भारत का देसी स्वाद—इन सबने मिलकर आज के 'इंडियन कुज़ीन' को जन्म दिया है [03:28]। लेकिन अगली बार जब आप आलू की सब्जी खाएं, तो याद रखिएगा कि इतिहास के सबसे ताकतवर बादशाहों ने इसे कभी नहीं चखा! [03:42]