ताजमहल 70 लाख लोगों की बॉडी से बना था ?

DAM ExclusiveBy The Empire files

जिस ताजमहल को हम लोग प्यार का प्रतीक (सिंबल ऑफ लव) कहते हैं, वही ताजमहल 70 लाख लोगों के शवों पर बना है। साल 1630 में जब ताजमहल का निर्माण शुरू हुआ, तब गुजरात और दक्कन में भयानक अकाल पड़ा था। उस दौरान 70 लाख से अधिक लोग भूख से तड़प-तड़प कर मर गए और हालात इतने बदतर थे कि लोग हड्डियां पीसकर खा रहे थे। लेकिन शाहजहां ने उस समय जनता को राहत देने के बजाय, उनसे टैक्स वसूला और खून-पसीने की कमाई से ताजमहल को सजाने में लगे रहे। हमें हमेशा यही पढ़ाया जाता है कि क्रूर औरंगज़ेब ने अपने पिता शाहजहां को जेल में डाल दिया और अपने भाइयों को मार डाला, पर सच तो यह है कि शाहजहां ने भी बिल्कुल ऐसा ही किया था। तख्त के लालच में शाहजहां ने अपने ही सगे, अंधे भाई—प्रिंस खुसरो—को हिरासत में लेकर बेरहमी से उसका कत्ल करवा दिया था, और अपने सभी भाइयों और भतीजों को मौत के घाट उतारकर वह राजा बना था।
लेकिन कर्म के सिद्धांत (लॉ ऑफ कर्मा) से कोई नहीं बच सकता। जो दर्द शाहजहां ने अपने अंधे भाई को दिया और जो बेरहमी उसने भूखी जनता के साथ की, ठीक वैसी ही लाचारी उसे अपने आखिरी वक्त में झेलनी पड़ी। उसके अपने बेटे औरंगज़ेब ने उसे आगरा के किले में कैद कर दिया और पानी की एक-एक बूंद के लिए तरसा दिया। आखिरकार, शाहजहां उसी ताजमहल को देखते-देखते जेल में तड़प-तड़प कर मर गया। क्या आपको नहीं लगता कि यह सब शाहजहां के कर्मों का ही फल था?